Sunday, 20 September 2015

विरह



मुसाफिर हैं हम तो
हमारे मिलने की खुशी क्या
और क्या ही जाने का गम

प्रेम तो बंधन विमुक्त होता है
और दूरियाँ भी ज़रूरी होती है
हमें पास होने का अहसास दिलाती है

जाने पर आँसू ना बहाया करो
दिल तो मेरा भी भर आता है
जाना थोड़ा मुस्किल हो जाता है

दिल की नज़र से देखो
साथ ही तो हूँ हर पल
और साथ लिए हूँ हमारा प्यार हर पल

Monday, 20 April 2015

दंभ

अभी अभी तो गिरा था तू
कितनी मुस्किल से संभला था तू
ना जाने फिर फस गया कैसे
इस दंभ के जाल मे तू
ये संसार तो मायावी है
और है इसके चाल अनेक
पर मन का दर्पण सब दिखलाता है
भंवर मे फसे नाव का केवट बन जाता है
नज़रों को इस दर्पण से कभी ओझल मत करना
हवा का रुख़ बदलते देर नही लगती

Monday, 17 November 2014

बाँवरा मन



मन रे बाँवरे
आँखिर क्या है तेरी तम्मना
चूहों की दौड़ से तुझे है निकलना
या लोगों की वाह-वाही है तुझे लूटना
तू जिस लिए है लड़ रहा
तेरी तड़प तो उससे कोसों दूर है
लोग तो यूँ ही ताली बजाएँगे
तुझे खुद से दूर लेजएँगे
खुद से कभी बात तो कर मूरख
तेरे सपने तो कुछ और ही है

Wednesday, 18 June 2014

मेरी आशा

गीता मे कहा है
कर्म करो और
फल की आशा मत करो
पर आशा ही तो जीवन है
और यही जीने की वजह

हार भी एक सत्य है
और निराशा भी
माना की दिल टूटा है
एक परिंदा रूठा है
मौसम भी पतझड़ का है

पर पतझर के बाद ही बहार आती है
परिंदों मे ख़ुसियाली लाती है
कौन कहता है टूटा दिल नही जुड़ता
आशा की किरण तो सदा ही रहती है
और हार के बाद ही जीत आती है